आर्यभट्ट सम्बन्धित रोचक तथ्य । Aryabhata Biography in Hindi

Amazing facts about Aryabhata Biography in Hindi


Aryabhata Biography in Hindi, आर्यभट प्राचीन भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिक और गणितज्ञ थे। उन्होंने वैज्ञानिक उन्नति में अपना बहुत योगदान दिया। आर्यभट्टीय ग्रंथ की रचना आर्यभट द्वारा की गई थी। जिसमें ज्योतिष शास्त्र के अनेक सिद्धांत विद्यमान है। उन्होंने अपने ग्रंथ में अपना जन्म स्थान कुसुमपुर (बिहार की राजधानी पटना)  और जन्मकाल  शक संवत  398 में दर्शाया है। कुसुमपुर  बिहार की राजधानी पटना का पुराना नाम है। आर्यभट्ट का जन्म  कुसुमपुर दक्षिण में हुआ था। यह बात सिद्ध हो चुकी है  कि इस महान वैज्ञानिक का जन्म गुप्त काल में हुआ था। इसीलिए गुप्तकाल में इस तरह के महान वैज्ञानिकों के दृष्टिकोण में साहित्य कला और विज्ञान के क्षेत्रों में बहुत अधिक उन्नति हुई है। भारतीय कैलेंडर के अनुसार कलयुग की शुरुआत कब 3101 ईसापूर्व हुई है।  इसके संदर्भ में आर्यभट्ट ने अपने ग्रंथ आर्यभटीय में बताया है, कि कलयुग के 3600 वर्ष बीत जाने के बाद उनकी आयु उस समय 23 वर्ष है। इससे यह सिद्ध होता है की आर्यभट का जन्म 476 इसवी में हुआ था। ये पहले ऐसे वैज्ञानिक थे जिन्होंने अपने जन्म की इतनी स्पष्ट सूचना दी है। लेकिन आज भी उनका जीवन और  जन्म स्थान के बारे में विवाद बना हुआ है। इतिहासकार कहते हैं कि उनका जन्म पटना में नहीं महाराष्ट्र में हुआ है। भले ही उनके ग्रंथ में कुसुमपुर पटना का जिक् हुआ है। आर्यभट के समय के राजा बुद्धगुप्त ने उनकी सूझ-बुझ को पहचानते हुए उन्हें नालंदा विश्वविद्यालय का प्रमुख बना दिया था। आर्यभट्ट का सही नाम आर्यभट है। इसको सबसे पहले डॉक्टर भाऊ दाजी ने स्पष्ट किया था। कुछ विद्वानों के अनुसार आर्यभट्ट ब्राह्मण थे। क्योंकि भट्ट शब्द का वास्तविक अभिप्राय योद्धा से है आर्यभट्ट के वर्तमान समय में चार ग्रंथ उपलब्ध हैं आर्यभटीय, दसगीतिका, तंत्र और आर्यभट्ट सिद्धांत। इनका सिद्धांत ग्रंथ पूरा उपलब्ध नहीं है। उसमें केवल 34 शलोक ही ज्ञात हैं।

Aryabhata Biography

Aryabhata Biography in Hindi


आर्यभट्ट सम्बन्धित रोचक तथ्य-



  1. इनके लोक प्रिय ग्रन्थ आर्यभटीय को आर्यभटीय नाम इनके 100 साल बाद भारतीय गणितज्ञ भास्कर ने दिया था।

  2. आर्यभटीय ग्रंथ में कुल 121 श्लोक है। जो चार भागों में बंटे हुए हैं। i. दशगीतिका, ii. गणितपाद,  iii. कालक्रिया iv. गोलपाद

  3. उन्होंने दशगीतिका भाग में पहले पांच ग्रहों की गणना एवम हिन्दू कालगणना और त्रिकोणमिति की चर्चा की है।

  4. गणितपाद में उन्होंने अंकगणित, बीजगणित और रेखागणित पर सम्पूर्ण जानकारी प्रदान की है।

  5. कालक्रिया में उन्होंने हिंदुकाल गणना सहित ग्रहों की गतियो पर जानकारी दी है।

  6. गोलपाद में इन्होने साइंस सम्बंदित जानकारी दी है। इसमें उन्होंने चन्द्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण तथा ग्रहों की गतिया समेत सूर्य से दुरी अदि की जानकारी दी है।

  7. आर्यभट्ट के अनुसार 1 साल की लंबाई 365.25868 दिन है जबकि वर्तमान गणना 365.25636 है।

  8. आर्यभट के अनुसार पृथ्वी की परिधि की लम्बाई 39,968.05 किलोमीटर बताई है। जबकि यह वास्तव में 40,075.01 से 0.2 प्रतिशत कम है।

  9. आर्यभट द्वारा बताई गई सूर्य और ग्रहों के बीच की दुरी वर्तमान मापक से मेल-जोल है। लेकिन उनके द्वारा पृथ्वी और सूर्य के बीच में बताई गई दुरी में अंतर पाया गया है।

  10. आर्यभट द्वारा पृथ्वी की एक दिन की घुमने की गति 23 घंटे, 56 मिनट, 4.1 सेकंड बताई गई है। जो की वास्तविकता से 0.86 सेकंड कम है।

  11. आर्यभट द्वारा चाँद के पृथ्वी के इर्द गिर्द चक्कर लगाने का समय 27.32167 दिन बताया गया है। जबकि वास्तविकता 27.32166 दिन के बराबर है।

  12. ज्यादातर लोग मानते है की आर्यभट ने जीरो (0) की खोज की थे। लेकिन यह कथन सत्य नहीं है। उन्होंने केवल गणनाओ को विशेष चिन्हों द्वारा लिखने की शुरुआत की थी। क्योंकि आर्यभट से पहले गणनाओ को शब्दों में लिखा जाता था। उन्होंने गणनाओ को आधुनिक नम्बरों में लिखना शुरू कर किया था।

  13. आर्यभट ने सूर्य ग्रहण और चन्द्र ग्रहण लगने की भी खोज की थी इसके साथ-साथ ग्रहण लगने का समय निकलने का फार्मूला और ग्रहण कितनी देर तक रहेगा इसके बारे में भी बताया था।

  14. आर्यभट ने पाई की वैल्यू (3.1416) को दशमलव के बाद चार अंको तक ही सही बताया है।

  15.  आज पूरी दुनिया में पढ़ी जाने वाली त्रिकोंमिति की खोज आर्यभट ने ही की थी।

  16.  भारतीय दर्शनशास्त्र के अनुसार सृष्टी की उत्पति पांच तत्वों से हुई है। लेकिन आर्यभट ने आकाश को तत्व नहीं माना है।

  17. आर्यभट मानते है, सूर्य सौर मंडल के केंद्र में स्थित है। पृथ्वी सहित अन्य ग्रह इसके परिक्रमा करते है।


Aryabhata Biography in Hindi

Aryabhata Biography in Hindi


आर्यभट के महानताओ को देखते हुए, भारत देश ने इस महान वैज्ञानिक के नाम उपग्रह 19 अप्रैल 1975 को अन्तरिक्ष में छोड़ा था। भारत एक ऐसा पहला देश है जिसने उपग्रह का नाम अपने महान वैज्ञानिक के नाम पर रखा था।

Tagline- Aryabhata Biography in Hindi, Aryabhata Discovery, Aryabhata a great man.

http://gazabknowledge.com/swami-vivekananda/

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

हरियाणा सामान्य ज्ञान-HARYANA GK FOR HSSC EXAMS IN HINDI (PART-6)

हरियाणा सामान्य ज्ञान-HARYANA GK FOR HSSC EXAMS IN HINDI (PART-3)

विज्ञान के बारे में 22 रोचक तथ्य | Science facts in Hindi