चाणक्य की जीवनी एवम नीतिया, Chanakya Quotes in Hindi

Interested facts about Chanakya Quotes in Hindi


Chanakya Quotes in Hindi, महान अर्थशास्त्री चाणक्य कोटिल्य के नाम से भी विख्यात है। ये एक ऐसी महान विभूति हैं, जिन्होंने अपनी विद्वता, बुद्धिमता और क्षमता के बल पर भारतीय इतिहास की नींव रखी थी। इन्होंने नंद वंश का विनाश करके चंद्रगुप्त मौर्य को राजा बनाया था। मौर्य साम्राज्य के संस्थापक चाणक्य कुशल राजनीतिक, चतुर कूटनीतिज्ञ और प्रखंड अर्थशास्त्री थे। इतना समय गुजरने के बाद आज भी चाणक्य द्वारा बताए गए सिद्धांत एवं नीतियां मान्य है। अर्थशास्त्र मौर्यकालीन शासन को भारतीय समाज का दर्पण कहा गया है। चाणक्य उस समय के बहुत ही महान और प्रसिद्ध विद्वान थे। उन्होंने निस्वार्थ भाव से मानव कल्याण के उद्देश्य के लिए अपना जीवन समर्पित किया है। चाणक्य ने अपनी नीतियों को आज से 2300 साल पहले लिखा था जो कि आज भी मानव जीवन के लिए काफी उपयोगी हैं।

Chanakya Quotes

Chanakya Quotes in Hindi


Chanakya Quotes

 (चाणक्य के सर्वश्रेठ अनमोल वचन)



  1. मूर्खों से तारीफ़ सुनने से बुद्धिमान की डांट सुनना ज्यादा बेहतर है।

  2. भाग्य उनका साथ देता है, जो हर संकट का सामना करके भी अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ रहते हैं।

  3. आलसी मनुष्य का वर्तमान और भविष्य नहीं होता।

  4. व्यक्ति अपने गुणों से ऊपर उठता है ऊंचे स्थान पर बैठने से ऊंचा नहीं हो जाता।

  5. इतिहास गवाह है की जितना नुकसान हमें दुर्जनों की दुर्जनता से नहीं हुआ है उससे ज्यादा नुकसान सज्जनों की निष्क्रियता से हुआ है।

  6. हमें भूतकाल के बारे में पछतावा नहीं करना चाहिए ना ही भविष्य के बारे में चिंतित होना चाहिए। विवेकवान व्यक्ति हमेशा वर्तमान में ही जाते हैं।

  7. जो स्त्री पराये घर में रहती है, जो पेड नदी किनारे होते हैं, जो राजा मंत्री नहीं रखता ये तीनो बहुत ही जल्दी नष्ट हो जाते हैं।

  8. इस बात को व्यक्त मत होने दीजिए कि आपने क्या करने की सोची है। बुद्धिमानी से इसे रहस्य बनाए रखिए और इस काम को करने के लिए दृढ़ रहीये।

  9. यह आठ कभी दूसरे का दुख नहीं समझते 1. राजा, 2. वेश्या, 3. यमराज, 4. अग्नि, 5.छोटा बच्चा, 6. चोर, 7. भिखारी, 8. कर वसूल करने वाला।

  10. सबसे बड़ा गुरु मंत्र है कभी भी अपने राज दूसरों को मत बताएं। यदि बताओगे तो यह आपको बर्बाद कर देंगे।

  11. कुए में उतरने वाली बाल्टी यदि झुकती है, तो भरकर आती है जीवन का भी यही गणित है, जो झुकता है वह प्राप्त करता है।  दादागिरी तो हम मरने के बाद भी करेंगे, लोग पैदल चलेंगे और हम कंधो पर।

  12. दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति नौजवानी और औरत की सुंदरता है।

  13. जैसे ही भय आपके करीब आए, उस पर आक्रमण कर उसे नष्ट कर दीजिए।

  14. कमजोर व्यक्ति से दुश्मनी ज्यादा खतरनाक होती है, क्योंकि वह उस समय हमला करता है, जिस समय  की आप कल्पना भी नहीं कर सकते।

  15. बुरे राजा के राज में न हीं तो जनता सुखी होगी, और ना ही उससे कभी जनता का भला होगा, बुरे राजा से तो अच्छा है कि राजा ना ही हो।

  16. अधिक सीधा-साधा होना भी अच्छा नहीं होता है, क्योंकि सीधे वृक्ष काट लिए जाते हैं और टेढ़े वृक्ष खड़े रह जाते हैं।

  17. हर मित्रता के पीछे कोई ना कोई स्वार्थ होता है, ऐसी कोई मित्रता नहीं है, जिसमें स्वार्थ न हो, यह जीवन का एक कड़वा सच है।

  18. भगवान मूर्तियों या मंदिरों में नहीं है, भगवान हमारी अनुभूति में विराजमान हैं, हमारी आत्मा ही भगवान का मंदिर है।

  19. सभी के शरीर में आत्मा रूपी मंदिर हैं, अनुभूति रूपी भगवान विराजित रहते हैं। बस इंसान उन्हें महसूस नहीं कर पाता और दुनियाभर में खोजता रहता है। जबकि भगवान हमारे अंदर ही मौजूद है।

  20. जब तक तुम दौड़ने का सांस नहीं जुटाओगे। प्रतिस्पर्धा में जितना तुम्हारे लिए असंभव बना रहेगा।

  21. ईश्वर चित्र में नहीं चरित्र में बसता है, अपनी आत्मा को मंदिर बनाओ।

  22. खुद का अपमान कराके जीने से तो अच्छा मर जाना है, क्योंकि प्राणों के त्यागने से केवल एक ही बार कष्ट होता है पर अपमानित होकर जीवित रहने से आजीवन दुख होता है।

  23. कोई भी काम शुरु करने से पहले तीन सवाल अपने आपसे पूछो, मैं ऐसा क्यों करने जा रहा हूं, इसका क्या परिणाम होगा, क्या मैं सफल रहूंगा।

  24. असंभव शब्द का प्रयोग केवल कायर करते हैं, बहादुर और बुद्धिमान व्यक्ति अपना मार्ग समय प्रशस्त करते हैं।

  25. व्यक्ति अपने कर्मों से महान बनता है, अपने जन्म से नहीं।

  26. शिक्षा सबसे अच्छी मित्र है, एक शिक्षित व्यक्ति हर जगह सम्मान पाता है। शिक्षा सौंदर्य और यौवन को परास्त कर देती है।

  27. दूसरों की गलतियों से सीखो अपने ही ऊपर प्रयोग करके सीखने में तुम्हारी उमर कम पड़ेगी।

  28. आंख से अंधे को दुनिया नहीं दिखती, काम के अंधे को विवेक नहीं दिखता, मद के अंधे को अपने आप से श्रेष्ठ नहीं दिखता और स्वार्थ को कही भी दोष नहीं दिखता।

  29. अगर आपको लोगों की जरूरत नहीं है, तो फिर लोगों को भी आपकी जरूरत नहीं है।

  30. मूर्खों से वाद-विवाद नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे केवल आप अपना समय ही नष्ट करेंगे।

  31. जब तक आपका शरीर स्वस्थ और नियंत्रण में हैं और मृत्यु दूर है, अपनी आत्मा को बचाने की कोशिश कीजिए, जब मृत्यु सर पर आ जाएगी तब आप क्या कर पाएंगे?

  32. संतुलित दिमाग जैसी कोई सादगी नहीं है, संतोष जैसा कोई सुख शौक नहीं है, लोभ जैसी कोई बीमारी नहीं है और दया जैसा कोई पुण्य नहीं है।

  33. फूलों की सुगंध केवल वायु की दिशा में फैलती है पर एक व्यक्ति की अच्छाई हर दिशा में फैलती है।

  34. प्रशंसा से बचो, यह आपके व्यक्तित्व की अच्छाइयों को घुन की तरह चाट जाती है।

  35. बुद्धि से पैसा कमाया जा सकता है ना की पैसे से बुद्धि हासिल की जा सकती हैं।

  36.  काम चाहे छोटा हो या बड़ा, एक बार हाथ में लेने के बाद उसे कभी छोड़ना नहीं चाहिए। अपनी पूरी लगन और सामर्थ्य से उस काम को पूरा करना चाहिए, यह गुण हमें सिंह से लेना चाहिए जो एक बार पकड़े शिकार को कदापि नहीं छोड़ता।

  37. यदि आप प्रयास करने के बाद भी असफल हो जाए, तो भी उस व्यक्ति से हर हाल में बेहतर होंगे, जिसको बिना किसी प्रयास के सफलता मिल गई हो।

  38. किसी भी मनुष्य की वर्तमान स्थिति को देखकर उसके भविष्य का उपहास मत उड़ाओ, क्योंकि काल में इतनी शक्ति है कि वह एक मामूली से कोयले के टुकड़े को हीरे में बदल सकता है।

  39. जो तुम्हारी बात सुनते हुए इधर-उधर देखे उस पर कभी विश्वास ना करो।

  40. जिस तरह सोने का परीक्षण उसे घिसकर, कटकर, तपाकर और पीटकर की जाती है, उसी तरह मनुष्य का परीक्षण भी उसके त्याग, आचरण, गुण और उसके व्यवहार से की जानी चाहिए।

  41. तपस्या हमेशा अकेले कि जानी चाहिए, अध्यन एवं अभ्यास दो लोग कर सकते हैं, गायन तीन लोग कर सकते हैं, कृषि चार लोगों को मिलकर करना चाहिए और युद्ध हमेशा अनेक लोगों के साथ मिलेगा करना चाहिए।

  42.  किसी भी व्यक्ति को बहुत ईमानदार नहीं होना चाहिए, सीधे वृक्ष और व्यक्ति पहले काटे जाते हैं।

  43. जिस प्रकार एक सूखे पेड़ को आग लगा दी जाए तो वह पूरा जंगल को जला देता है, उसी प्रकार एक पापी पुत्र पूरे परिवार को बर्बाद कर देता है।

  44. कष्ट और विपत्ति मनुष्य के को शिक्षा देने वाले श्रेष्ठ गुण हैं, जो सांहस के साथ उनका सामना करते हैं वह विजयी होते हैं।

  45.  सज्जन तिल बराबर उपकार को भी पर्वत के समान बड़ा मानकर चलता है।

  46. शत्रु द्वारा किए गए स्नेहपूर्ण व्यवहार को दोषमुक्त नहीं समझना चाहिए।

  47.  जिसने अन्याय पूर्वक धन इकट्ठा किया है और अकड़ कर सदा सिर उठाए रखा है, ऐसे लोग धरती पर भार होते हैं। इन्हें कहीं शांति नहीं मिलती।

  48. अपने बच्चों को पहले 5 साल तक खूब प्यार करो, 6 से 15 साल तक कठोर अनुशासन और संस्कार दो, 16 साल के बाद उनके साथ मित्रता करो। आपके संतानी ही आपकी सबसे अच्छी मित्र है।

  49. कुबेर भी यदि आय से अधिक खर्च करे निर्धन हो जाता है।

  50. सांप के दांत में,  बिच्छू के डंक में,  मक्खी के सिर में और मनुष्य के मन में जहर होता है।

  51. मनुष्य स्वयं ही अपने कर्मों के द्वारा जीवन में दुखों को बुलाता है।


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Comments

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