स्वर्ण मंदिर का इतिहास, Golden Temple History in Hindi
Knowledge about Golden Temple History in Hindi
Golden Temple History, इतिहास के अनुसार सिखो के गुरु, अर्जुन देव जी ने लाहौर के संत साईं मियां मीर जी के दृष्टिकोण में 1588 में स्वर्ण मंदिर की नींव रखवाई थी। इसका दोबारा निर्माण17 सदी में महाराजा सरदार जस्सा सिंह अहलूवालिया ने करवाया था। अफगान हमलावारों ने फिर 19वीं शताब्दी में दोबारा से पूरी तरह से नष्ट कर दिया था। लेकिन सिख धर्म की आस्था को देखते हुए महाराजा रणजीत सिंह ने इसको दोबारा से बनवाया था, और इसको सोने की परत से सजाया था। अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर, श्री हरिमंदिर साहिब के नाम से भी जाना जाता है।
Golden Temple History
(स्वर्ण मंदिर की खास विशेषताए)
यह सिख धर्म का बहुत ही पावन धार्मिक स्थल और प्रमुख गुरुद्वारा है। यह पंजाब राज्य के अमृतसर शहर में स्थित है। स्वर्ण मंदिर की विशेषता को देखने के लिए प्रतिदिन हजारों पर्यटक आते हैं। इस मंदिर को स्वर्ण मंदिर अथवा गोल्डन टेंपल के नाम से भी जाना जाता है। यह एक बहुत सुंदर कलाकारी का उदहारण देते हुए एक सरोवर के बीचो-बीच बना हुआ है। इसका निर्माण गुरु रामदास ने स्वयं अपने हाथों से किया था। इसमें रोचक बात यह है, कि यह सिक्खों का गुरुद्वारा है लेकिन इसकी नीव एक मुसलमान ने रखी थी। अमृतसर शहर स्वर्ण मंदिर के चारों ओर बसा हुआ है। इस मंदिर में खास बात यह है कि यहां सभी धर्मों के लोग आते हैं। क्योंकि लोगों की स्वर्ण मंदिर और सिख धर्म में गहरी आस्था है और यह लुभावना पर्यटक स्थल है। यह गुरुद्वारा लगभग 400 साल पुराना है। इस का नक्शा गुरु अर्जन देव ने खुद अपने हाथों से तैयार किया था। गुरूद्वारे की सुन्दरता बढाने के लिए इसके चारों ओर दरवाजे हैं जो कि चारों दिशाओं पूर्व, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण में खुलते हैं। 400 साल पहले भी हमारा समाज चार जातियों में विभाजित था। कुछ जातियों को गुरुद्वारे में आने की इजाजत नहीं थी। गुरुद्वारे के अलावा यहां पर दो बड़े और भी और कई छोटे-छोटे तीर्थ स्थल भी हैं जो तीर्थ स्थल सरोवर के चारों ओर फैले हुए हैं। गुरुद्वारे के आस पास सरोवर को अमृत झील के नाम से भी जाना जाता है। स्वर्ण मंदिर की दीवारों पर सोने की पत्तियों से कारागिरी की गई है और यह सफेद संगमरमर से बना हुआ है। स्वर्ण मंदिर में पूरा दिन गुरबाणी गूंजती रहती है। सभी धर्मो के लोग मंदिर में प्रवेश करने से पहले मंदिर के सामने अपना सर झुकाते हैं और फिर सरोवर में पैर धोकर ही सीढ़ियों से मुख्य मंदिर तक जाते हैं। स्वर्ण मंदिर एक बहुत ही खूबसूरत और गजब इमारत है। स्वर्ण मंदिर में सिख सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए स्मारक भी बनाया गया है। स्वर्ण मंदिर में गुरु राम राय सराय के अंदर विश्राम स्थल है। यहां पर 24 घंटे लंगर चलता रहता है। गुरूद्वारे में आने वाले श्रधालुओ के लिए खाने पिने की पूरी व्यवस्था होती है। लगभग 40,000 लोग यहाँ लंगर का प्रसाद ग्रहण करते है। इसके साथ साथ यहाँ गुरु रामदास सराय में ठहरने की भी व्यवस्था भी है इस सराय का निर्माण 1784 में हुआ था। यहाँ पर्यटकों के ठहरने के लिए 228 कमरे व 18 बड़े हाल है। इसी मंदिर के अंदर एक बेरी वृक्ष को तीर्थ स्थल माना जाता है इसे बेर बाबा बुड्ढा के नाम से जाना जाता है। क्योंकि जिस समय मंदिर का निर्माण हो रहा था बाबा बुड्ढा जी इसी वृक्ष के नीचे बैठे थे और निर्माण कार्य पर नजर रखे हुए थे। गुरुद्वारे के नजदीक बहुत से महत्वपूर्ण स्थान है जैसे की थड़ा साहिब, बेर बाबा बुड्ढा जी, गुरुद्वारा लाची बार, गुरुद्वारा शहीद बंगा बाबा दीप सिंह स्वर्ण मंदिर के समीप हैं। उनकी भी अपनी अलग पहचान है। जलियांवाला बाग भी स्वर्ण मंदिर के नजदीक स्थित है, जहां जनरल डायर की क्रूरता की निशानियां आज भी दीवारों पर साफ साफ दिखाई देती हैं। वहां जाकर शहीदों की कुर्बानियों की याद नई हो जाती है
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goldan tampal kya wakai sahar ke charo or basa hai
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