नेताजी सुभाष चंद्र बोस सम्बन्धित रोचक तथ्य - Subhash Chandra Bose in Hindi
Interested facts about Subhash Chandra Bose in Hindi
Subhash Chandra Bose जी को नेताजी के नाम से भी पुकारा जाता है। ये भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के प्रमुख नेता थे। दुसरे विशव युद्ध के समय इन्होंने जापान के सहयोग से ‘आज़ाद हिन्द फौज’ का निर्माण किया। ये अंग्रेज़ों के खिलाफ थे। नेताजी सुभाष चन्द्र बोस भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अधिक प्रेरणा के स्रोत थे इन्होने कहा था, ” तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा।” और इस नारे के तुरन्त बाद सभी देशवासी आगे आकर खड़े हो गए। सभी देशवासीयो में नेताजी के लिए प्रेम व श्रद्धा थी। कितने दुर्भाग्य कि बात है की हमें आज़ादी मिली, संविधान भी बना, कई सरकारें भी आईं और चली गईं, परन्तु किसी ने उनके बारे में जानने की कोशिश नहीं की, जिसने भारत की आज़ादी के लिए दिन-रात एक कर दिया था। उनकी मौत एक सामजस्य बनी हुई है। आज तक पता नहीं है उनकी मौत कैसे हुई थी। इसे उनकी क़िस्मत का खेल कहा जा सकता है, या उनकी बदक़िस्मती। आज तक उनकी मौत की पूर्ण रूप से जानकारी नहीं मिल पाई है। इस पोस्ट में कुछ ऐसे तथ्य है जिनमे आपको ज्यादा रोचक जानकारी मिलेगी।
Subhash Chandra Bose in Hindi
प्रारंभिक जीवन -
Subhash Chandra Bose का जन्म 23 जनवरी 1897 को कटक, उड़ीसा में हुआ था। ये एक मध्यम वर्गीय परिवार से थे। सन 1920 में वह उन भारतीयों में से एक थे, जिन्होंने आई.सी.एस. परीक्षा पास कर ली थी। ये भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य भी बने और दोबारा 1939 में त्रिपुरा सेशन कांग्रेस के अध्यक्ष नियुक्त किये गये। उनके पिता का नाम जानकीनाथ था जो पेशे से वकील थे। और ऊनकी माता का नाम प्रभा देवी था। जो काफी धार्मिक विचारो की महिला थीं। सुभाष चन्द्र बोस शुरु से ही योग्य छात्र थे। ये कलकत्ता के प्रेसीडेंसी कॉलेज में पदाई के दौरान स्वतन्त्रता संग्राम में भी भाग लेते रहे। जिससे उनको कॉलेज से निकाल दिया गया।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस सम्बन्धित रोचक तथ्य -
- नेताजी सुभाष चन्द्र बोस अपने माता-पिता की 14 सन्तानों में से नौवीं सन्तान थे।
- उनके पिता चाहते थे की वे आई.सी.एस. बनें। इसके लिए नेताजी आई. ए. एस. (भारतीय नागरिक सेवा) की परीक्षा के लिए लंदन गए और उस परीक्षा में चौथा स्थान प्राप्त किया।
- नेताजी कई बार महात्मा गाँधी के नेतृत्व में जेल गए जिससे उनका स्वास्थ्य काफी गिर गया। लेकिन उनकी दृढ इच्छा शक्ति में कोई अन्तर नहीं आया।
- इनके अन्दर राष्ट्रीय भावना कूट-2 कर भरी हुई थी। इन्होंने भारत छोड़ने जर्मन गए, उसके बाद 1943 में सिंगापुर पहुच कर इण्डियन नेशनल आर्मी को संभाला।
- इन्होने जर्मनी और जापान की सहायता से उन्होंने एक सेना का गठन किया, जिसका नाम उन्होंने ” आजाद हिन्द फौज ” था। उनकी सेना ने भारत के राज्य अण्डमान-निकोबार, द्वीप समूह, नागालैण्ड और मणिपुर में आजादी का डंका बजाया।
- सुभाषचंद्र बोस ने भगत सिंह की फांसी रुकवाने के लिए गांधी जी से कहा कि वह अंग्रेजों से किया अपना वादा तोड़ दें लेकिन फिर भी वह भगत सिंह को बचाने में नाकाम रहे।
- साल 1933 में उन्हें देश निकाला दे दिया गया। इसके बावजूद भी वे 1936 में काँग्रेस के अधिवेशन में भाग लेने के लिए दो बार भारत आए, मगर दोनों ही बार अंग्रेजी सरकार ने उन्हें गिरफ्तार करके वापस विदेश भेज दिया।
- साल 1938 में सुभाष चन्द्र बोस कांग्रेस के अध्यक्ष नियुक्त हुए। इस पद के लिए गांधी जी ने उन्हें चुना था। लेकिन गांधी जी और उनके साथियों के व्यवहार को देखते हुए। सुभाष चन्द्र बोस ने 29 अप्रैल, 1939 इस पद से त्यागपत्र दे दिया।
- इनके ऊपर लौह पुरुष सरदार पटेल ने मामूली संपत्ति के लिए मुकदमा किया था, जबकि सच्चाई यह थी कि लौह पुरुष सरदार पटेल केवल गांधी के सम्मान में सुभाषचंद्र बोस को नीचा दिखाना चाहते थे।
- नेताजी ने अपने जीवन में 11 बार जेल की सजा काटी। अंतिम बार 1941 को उन्हें कलकत्ता कोर्ट में पेश होना था लेकिन नेताजी घर से भागकर जर्मनी चले गए और हिटलर से मिले।
- एडोल्फ हिटलर ने सबसे पहले सुभाषचंद्र बोस जी को नेताजी कहा था।
- सुभाषचंद्र बोस की जानकारी शेंकल नाम की टाइपिस्ट महिला से हुई। जिससे उन्होंने अपनी किताब टाइप करवाई और 1942 में इस महिला से शादी कर ली।
- नेताजी की अस्थियां जापान के रैंकोजी मंदिर में आज भी संभाल कर रखी गई हैं। यह बात शायद बहुत कम लोगो को पता है।
- नेताजी की मौत की जानकारी अभी तक आम लोगों को नहीं मिल पाई है, इसके संबंध में आज तक की जानकारी के आधार पर इनकी मौत 18 अगस्त 1945 को ताइहोकू एयरपोर्ट पर विमान के क्रेश होने से हुई थी।
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