स्वामी विवेकानंद सम्बन्धित रोचक तथ्य - Swami Vivekananda in Hindi
Some interesting facts about Swami Vivekananda
Swami Vivekananda in Hindi, लगभग 152 साल पहले स्वामी विवेकानन्द जी का जन्म 12 जनवरी, 1863 को कलकत्ता में हुआ था। इन्होने समूची दुनिया में भारत को अपने ज्ञान की रौशनी से जगमग कर दिया। स्वामी विवेकानन्द वेदो के प्रसिद्ध और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु थे। सन्यास धारण करने से पहले इनका नाम नरेन्द्र नाथ दत्त था। उन्होंने अमेरिका में आयोजित विश्व धर्म महासभा में भारत की ओर से सनातन धर्म के बारे में बताया था। स्वामी विवेकानन्द ने भारतीय वेदों को अमेरिका और यूरोप के हर एक देश में पहुचाया। ये रामकृष्ण परमहंस के सुयोग्य शिष्य थे। ये अपने भाषण की शुरुआत ” मेरे अमेरिकी भाइयों एवं बहनों ” वाक्य के साथ करते थे।
Swami Vivekananda in Hindi
स्वामी विवेकानंद ने अपने जीवन में संन्यासी के रूप में देश और समाज की भलाई के लिए कार्य किया। अपने ज्ञान एवम बुद्धि के बल पर स्वामी विवेकानंद का विश्व में उच्च स्थान था। ये हिंदुस्तान के लोगों के लिए आज भी प्रेरणा का स्त्रोत है और लोग उनका अनुसरण करने को मजबूर हो जाते हैं। 12 जनवरी का दिन स्वामी विवेकानंद के नाम पर युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है।
Swami Vivekananda in Hindi
स्वामी विवेकानंद एक संन्यासी थे और एक ऐसा संन्यासी जिन्होंने अपने ज्ञान के बल पर दुनिया का दिल जीत लिया। स्वामी विवेकानंद एक बार एक वेश्या के आगे हार गए थे। बात तब की है जब स्वामी विवेकानंद जयपुर की रियासत में मेहमान बनकर गए थे, वहा से जाने का समय आने पर विदा लेने लगे तो रियासत के राजा ने उनके लिए एक स्वागत समारोह रखा। जिसमे उन्होंने बनारस से एक प्रसिद्ध वेश्या को बुलाया। जब वेश्या के भजन गा रही थी तब उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे। तभी उस वेश्या के भजन सुनकर स्वामी विवेकानंद बाहर से अंदर आ गए।यह भी कहा जाता है कि स्वामी विवेकानंद का घर एक वेश्या मोहल्ले में था जिस कारण वे अपने घर के लिए दो मील दूर का चक्कर लगाकर घर पहुंचते थे।
स्वामी विवेकानंद सम्बन्धित रोचक तथ्य -
- स्वामी विवेकानंद का जन्म एक रूढ़िवादी हिन्दु परिवार में हुआ था।
- सबसे पहले उनका नाम वीरेश्वर उनकी माता जी द्वारा रखा गया था। वे उन्हें अक्सर बिली कहकर पुकारती थी। लेकिन बड़े में नाम बदल कर नरेंद्रनाथ दत्त रखा गया।
- भारत में 12 जनवरी यानि स्वामी विवेकानंद के जन्मदिवस को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है।
- स्वामी विवेकानंद जी को अपनी भाषा पर बहुत गर्व था। विदेश से आये हुए लोगो ने उनसे hello कहा और हाथ मिलाने के लिए उनकी तरफ हाथ बढाया तो उन्होंने दोनों हाथ जोड़कर नमस्ते कहा, उनको लगा शायद इनको अंग्रेजी नहीं आती है। तभी उन्होंने हिंदी में पूछा “आप कैसे हैं”? स्वामी जी ने तुरंत कहा “आई एम् फ़ाईन थैंक यू”।
- स्वामी विवेकानन्द जी कहते थे यदि किसी भी भाई बहन इंग्लिश भाषा का ज्ञान नहीं आता है तो उन्हें शर्मिंदा नहीं होना चाहिए, बल्कि शर्मिंदा तो उन्हें होना चाहिए जिन्हें हिंदी नहीं आती है क्योंकि हिंदी ही हमारी राष्ट्र भाषा है।
- कुछ लोगो ने स्वामी जी से कहा ‘अरे! यह कैसी संस्कृति है। आपकी ? तन पर केवल एक भगवा चादर लपेट रखी है। स्वामी विवेकानन्द कहते थे संस्कृति वस्त्रों में नहीं, चरित्र के विकास में है।
- स्वामी विवेकानंद जी नारी जाति का सम्मान करते थे। वे हमेशा नारी जाति के चरणों को निहारते थे।
- स्वामी विवेकानंद के पिता की मृत्यु के पशचात उन्होंने अपना जीवन बहुत गरीबी में बिताया। एक दिन के भोजन के उनके परिवार को बहुत संघर्ष करना पड़ता था। कभी-2 तो स्वामी जी दो दिन तक भूखे रहे है, ताकि परिवार के लोग अपना पेट भर सके।
- स्वामी विवेकानंद जी का भगवान से भरोसा उठ गया था। व नास्तिक बन चुके थे। क्योंकि .ए. की डिग्री होने के बाद भी उनको रोजगार की तलाश में भटकना पड़ा।
- स्वामी विवेकानंद के प्रिय गुरु का नाम रामकृष्ण परमहंस था। लेकिन उन्होंने कभी भी अपने गुरु पर पूर्ण रूप से विश्वास नहीं किया। वे प्रत्येक बात पर रामकृष्ण की परीक्षा लेते थे और संदेह करते थे।
- इस बात का बहुत कम लोगो को पता है की महाराजा अजीत सिंह स्वामीजी की मां को आर्थिक सहायता के रूप नियमित 100 रूपये भेजते थे।
- इनके गुरु स्वामी रामकृष्ण परमहंस ने नरेन्द्रदत्त से पूछा "क्या तुम धर्म विषयक कुछ भजन गा सकते हो?" इन्होने कहा, "हाँ, गा सकता हूँ।" और तुरंत दो-तीन भजन अपने मधुर आवाज गाए।
- इनकी इस प्रकार गुरु भक्ति को देखकर स्वामी परमहंस अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने इन्हें सत्संग करने करने की अनुमति दी और अपना शिष्य बना लिया।
- इन्होने साल 1893 में अमेरिका स्थित शिकागो में सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व करते हुए अपने भाषण की शुरुआत ‘मेरे अमरीकी भाइयों एवं बहनों’ वाक्य के साथ की, जिससे सभी का दिल जीतने में सफल हुए।
- स्वामी जी सादगी और ब्रहमचार्य जीवन में विस्वास रखते थे।
- स्वामी विवेकानंद ने 11 सितम्बर को “विश्व भाईचारा दिवस” के लिए जोर दिया था और इस बारे में शिकागो धर्म संसद में अपना भाषण दिया था।
- स्वामी विवेकानंद ने पहले ही अपने जीवनकल की भविष्यवाणी की थी। उन्होंने कहा था की वे अपनी उम्र के 40 साल पुरे कर सकेंगे। यह बात सत्य साबित हुई और उनकी मृत्यु 4 जुलाई 1902 को 39 वर्ष की उम्र में ही हो गई थी।
- स्वामी विवेकानंद जी निद्रा रोग से ग्रसित थे, वे जिंदगी में कभी भी बिस्तर पर लेटते ही नहीं सो सके।
- स्वामी विवेकानंद जी के निधन की वजह तीसरी बार दिल का दौरा पड़ना था।
- स्वामी विवेकानंद जी ने अंतिम सांसे लेते हुए कहा था एक स्वस्थ जीवन और लम्बी आयु के लिए जीवन में सेक्स बहुत जरूरी है। यदि में ब्रहमचारी जीवन न जीता तो आज में जीवित होता।
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